बहुत दिनों से ये ज़मीन वीरान है
कुछ धुन्दले से पुराने निशान है
आज बहुत दिन बादएक घटा सी छाई है
दिल में एक अरमान
एक ख़ुशी सी आई है
आज फिर "नम्रता " ने कलम उठाई है |
शब्दों का भवंदर सा उठा है
आँखें सो रही आज कान उठा है
तमाम हसरतें आज जवां हो रही
हर ख्वाहिशें आज बयां हो रही
वो देखो दूर एक कलि मुस्काई है
आज फिर "नम्रता " ने कलम उठाई है |
अब हर पत्ता सलिकें से सज गया है
अब हर साज़ अपने आप बज गया है
हर रंग ने पिरो के एक तस्वीर बनायीं है
वो देखो सुकून की एक लहर आई है
हाँ आज इस ज़मीन पे बरसात आई है
क्यूंकि आज फिर "नम्रता " ने कलम उठाई है |

amazing didi...:)
ReplyDeleteBahut khub nammy ji
ReplyDeletewow very good :)
ReplyDeleteReally awesum.dear:))
ReplyDeleteWow really awesum
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